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Thursday, 6 February 2020

ए o पी o जे o अब्दुल कलाम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जो छात्रों को मालूम होना चाहिए।

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम

भारत के पूर्व राष्ट्रपति ,परमाणु वैज्ञानिक एवं मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध ,


अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम मसऊदी अथवा ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम मसऊदी(अंग्रेज़ीA P J Abdul Kalam), (15 अक्टूबर 1931 – 27 जुलाई 2015) इन्हे मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे।[4] वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। उन्होंने सिखाया जीवन में चाहें जैसे भी परिस्थिति क्यों न हो पर जब आप अपने सपने को पूरा करने की ठान लेते हैं तो उन्हें पूरा करके ही रहते हैं। अब्दुल कलाम के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम मसऊदी
அ.ப.ஜெ.அப்துல் கலாकलाम मसऊदी

भारत के 11वें राष्ट्रपति
पदस्थ
कार्यभार ग्रहण 
25 जुलाई 2002
प्रधान  मंत्रीअटल बिहारी वाजपयी
मनमोहन सिंह
उपराष्ट्रपतिकृष्ण कान्त
भैरोंसिंह शेखावत
पूर्व अधिकारीके॰ आर॰ नारायणन
उत्तराधिकारीप्रतिभा देवीसिंह पाटिल

जन्म15 अक्टूबर 1931 [1]
रामेश्वरम, रमानाथपुरम जिला, ब्रिटिश राज (मौजूदा तमिलनाडुभारत)
मृत्यु27 जुलाई 2015 (उम्र 83)[2]
शिलोंगमेघालयभारत
विद्या अर्जनसेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
पेशाप्रोफेसर, लेखक, वैज्ञानिक
एयरोस्पेस इंजीनियर
धर्मइस्लाम[3]
हस्ताक्षरए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम के हस्ताक्षर
वेबसाइटabdulkalam.com
इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में 'मिसाइल मैन' के रूप में जाना जाता है।[5]
इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई।[6]
कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गए।[7] पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये।




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